ई-रुपी पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च

आरबीआई ने मंगलवार को डिजिटल करेंसी (ई-रुपी) के पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत कर दी। इसे आरबीआई रेगुलेट रिज़र्व बैंक करेगा। ई-रुपी जारी करने के लिए आरबीआई ने एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई समेत 9 बैंक चुने हैं। अभी यह सिर्फ भारतीय ₹ ERVOF थोक लेनदेन के लिए इस्तेमाल हो सकेगा। इससे सीमापार भुगतान भी होगा। दुनिया के 60 केंद्रीय बैंकों ने इसमें रुची दिखाई है। यह भुगतान का एक और तरीका है, जो वर्तमान पेमेंट प्रणाली को सहयोग देगा। ई-रूपी का फायदा क्या है?

ई-रुपी की मॉनिटरिंग आसान होगी। सरकार को यह पता होगा कि पैसा कहां है। ट्रांजेक्शन लागत कम होगी। नोट छापने का खर्च बचेगा। कॉमर्शियल बैंकों पर निर्भरता घटेगी।

• हम ई-रुपी कैसे हासिल कर सकते हैं? इसके लिए आरबीआई मोबाइल एप ला रहा है। • मैं डेबिट/क्रेडिट कार्ड / यूपीआई के जरिए लेनदेन करता हूं। उनमें और ई-रुपी में क्या अंतर है? ई-रुपी डिजिटल टोकन के रूप में मिलेगा। यह कैश की तरह इस्तेमाल हो सकेगा। आरबीआई की वही गारंटी इस पर भी है, जो नोट पर होती है। • क्या खाते की रकम को ई-रुपी में बदलवा सकते हैं? हां। बैंक से नोट के बदले ई-रुपी भी ले सकते हैं। ‘ई-रुपी किस वर्ग के लिए ज्यादा उपयोगी है? आम लोग छोटे पेमेंट भी इससे कर सकेंगे। बड़ी रकम का लेनदेन करने वाले कारोबारियों, संस्थानों के लिए यह विशेष उपयोगी होगा। उन्हें बड़ी रकम नकदी में ले जाने की जरूरत नहीं होगी।

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