कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक (Yasin Malik) को आतंकी फंडिंग मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई

कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक (Yasin Malik) को आतंकी फंडिंग मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. पटियाला हाईकोर्ट ने यासीन मलिक को अलग-अलग मामलों में यह सजा मुकर्रर की है. यासीन मलिक को कई धाराओं में दोषी पाया गया था और अब उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. उम्रकैद की सजा (Life Imprisonment) मुकर्रर होने के बाद अब लोगों के मन में सवाल है कि क्या यासीन मलिक को 14 साल ही जेल में रहना होगा या फिर यासीन मलिक की पूरी जिंदगी जेल में कटेगी. तो हम आपको बताते हैं कि उम्रकैद की सजा का मतलब क्या है और उसमें दोषी को कितने दिन जेल में रहना होता है.

कोर्ट ने कुल दो मामलों में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है, जिसमें एक केस में 10 साल की सजा सुनाई गई है. वहीं, एक केस में उम्रकैद की सजा दी गई है. सजा के अलावा यासीन मलिक पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. यासीन मलिक को UAPA कानून की धारा 16 (आतंकवादी अधिनियम), UAPA धारा 17 (आतंकवादी गतिविधि के लिए धन जुटाने), UAPA धारा 18 (आतंकवादी कृत्य करने की साजिश), UAPA धारा 20 (एक आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य), आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) और 124 ए (देशद्रोह) के तहत एनआईए कोर्ट ने दोषी ठहराया गया है.

क्या है उम्रकैद का मतलब?

उम्रकैद को लेकर कई तरह के सवाल किए जाते हैं कि इस सजा में कितने दिन जेल में रहना होगा. वैसे आपको बता दें कि उम्रकैद में दोषी व्यक्ति को जेल में रखा जाता है और उसे जिंदगीभर जेल में ही रहना होता है. कई बार कैदी लगातार कोर्ट में इसके लिए याचिका भी दायर करते हैं, जिस पर कोर्ट अपने हिसाब से फैसला करता है. इसी बीच कैदी को पैरोल, मेडिकल ग्राउंड पर जेल से बाहर किया जाता है, लेकिन फिर से जेल में आना पड़ता है. मगर जीवन जेल में ही गुजरता है.

14 साल के बाद मिल जाती है छुट्टी?

सभारत के सु्प्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को लेकर स्पष्टीकरण दे दिया था कि उम्रकैद का मतलब क्या है. दिल्ली हाईकोर्ट के वकील प्रेम जोशी ने टीवी-9 को बताया, सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही यह साफ कर दिया है कि सीआरपीसी के आर्टिकल 72 और 161 के तहत उम्रकैद का मतलब है पूरी जिंदगी जेल में रहना. साथ ही उन्होंने बताया कि 14 साल का कोई मतलब नहीं होता है और ऐसा नहीं है कि उम्रकैद के आरोपी की 14 साल में रिहाई हो जाती है. यह बाद में कोर्ट 14 साल इसे कम या ज्यादा कर सकता है.

क्या है 14 साल की कहानी?

दरअसल, ये क्रिमिनल प्रोसिजर कोड के एक प्रोविजन की वजह से है जिसमें 14 साल की लिमिट का जिक्र किया जाता है. इस प्रोविजन के अनुसार जब अपराधी 14 साल की सजा काट लेता है तो उसके व्यवहार के आधार पर उसके केस को सेंटेंस रिव्यू कमिटी के पास भेजा जाता है. वहीं इस मामले में राज्य सरकार ही इसकी सजा में कमी कर सकती है. हालांकि कई ऐसे केस होते हैं, जिनमें यह सजा कम नहीं हो पाती है. ये कहा जाता है कि पहले दोषी को कम से कम 14 साल जेल में रहना ही होगा और उसके बाद इसमें बदलाव संभव है.

बता दें कि राज्य सरकारों की ओर से कई लोगों की सजा माफ कर दी जाती है, जिससे लोग समझते हैं कि उम्रकैद में 14 साल बाद ही रिहाई मिल जाती है. आपने देखा होगा कि हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी के दिन कई कैदियों की रिहाई कर दी जाती है, वो इसी वजह से होती है.अगर उम्रकैद की बात करें तो इसमें कई बार सजा कम भी जाती है. दरअसल 14 साल पहले जब अपराधी सजा कम करने के लिए अपील करता है तो उन्हें छूट मिल जाती है.


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