13554.42 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक पांच वर्षों के लिए 15वें वित्त आयोग समयावधि के दौरान चालू योजना के अंतर्गत- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) जारी रहेगा

भारत सरकार का सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम -एमएसएमई मंत्रालय, गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना में सहायता करके देश भर में बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की सुविधा के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) लागू कर रही है। इस के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग-केवीआईसी राष्ट्रीय स्तर की नोडल एजेंसी है। राज्य/जिला स्तर पर केवीआईसी के राज्य कार्यालय, राज्य केवीआईबी और डीआईसी कार्यान्वयन एजेंसियां हैं। कॉयर बोर्ड कॉयर इकाइयों के लिए कार्यान्वयन एजेंसी है।

बैंकों द्वारा निधियों की स्वीकृति और जारी करने के लिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया https://www.kviconline.gov.in/pmeepeportal/pmegphome/index.jsp पोर्टल के ज़रिये ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध है।

वर्ष 2008-09 में इसकी स्थापना के बाद से, लगभग 7.8 लाख सूक्ष्म उद्यमों को 19,995 करोड़ रुपये की सब्सिडी के साथ 64 लाख व्यक्तियों के लिए अनुमानित स्थायी रूप से रोजगार पैदा करने में सहायता मिली है। सहायता प्राप्त लगभग 80 प्रतिशत इकाइयाँ ग्रामीण क्षेत्रों में हैं और लगभग 50 प्रतिशत इकाइयाँ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला श्रेणियों के स्वामित्व में हैं।

पीएमईजीपी को अब 13554.42 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 2021-22 से 2025-26 तक पांच वर्षों के लिए 15वें वित्त आयोग की समयावधि के दौरान जारी रखने के लिए अनुमोदित किया गया है। मौजूदा योजना में निम्नलिखित प्रमुख संशोधन/सुधार किए गए हैं:

i. अधिकतम परियोजना लागत को मौजूदा 25 लाख रुपये से बढ़ाकर विनिर्माण इकाइयों के लिए 50 लाख रुपये और सेवा इकाइयों के लिए मौजूदा 10 लाख रुपये से 20 लाख रुपये कर दिया गया है।

पीएमईजीपी के लिए ग्रामोद्योग और ग्रामीण क्षेत्र की परिभाषा संशोधित किया गया है। पंचायती राज संस्थाओं के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों को ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत, जबकि नगर पालिका के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों को शहरी क्षेत्र के रूप में शामिल माना जाएगा।सभी कार्यान्वयन एजेंसियों को ग्रामीण या शहरी श्रेणी के बावजूद सभी क्षेत्रों में आवेदन प्राप्त करने और संसाधित करने की अनुमति दी गई है।आकांक्षी जिलों और ट्रांसजेंडर श्रेणी के अंतर्गत पीएमईजीपी आवेदकों को विशेष श्रेणी के आवेदकों के रूप में माना जाएगा और वे उच्च सब्सिडी के लिए पात्र होंगे।

प्रमुख प्रभाव: योजना पांच वित्तीय वर्षों में लगभग 40 लाख व्यक्तियों के लिए अनुमानित स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करेगी।

शामिल किए गए राज्य/जिले: सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को इस योजना के अंतर्गत शामिल किया जाएगा।

मार्जिन मनी सब्सिडी की उच्च दर – शहरी क्षेत्र में परियोजना लागत का 25 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं, ट्रांसजेंडर, शारीरिक रूप से दिव्‍यांग, पूर्वोत्तर क्षेत्र, आकांक्षी और विशेष श्रेणी के आवेदकों और सीमावर्ती जिले के आवेदकों के लिए में परियोजना लागत का 35 प्रतिशत है। सामान्य श्रेणी के आवेदकों के लिए शहरी क्षेत्र में परियोजना लागत का 15 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में परियोजना लागत का 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है।

संशोधित योजना के दिशानिर्देश वेबसाइट:  msme.gov.in पर उपलब्ध होंगे।  

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